सब-रजिस्ट्रार पर निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग, पत्रकार सुरक्षा परिषद ने डीएम को सौंपा ज्ञापन; 5 अक्टूबर की सड़क दुर्घटना में वृद्ध की मौत का मामला
संवाददाता दीपक सोनी

हमीरपुर । सरीला तहसील में तैनात सब-रजिस्ट्रार सुशील कुमार गुप्ता की कार्यशैली और भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद (रजि.) ने जिलाधिकारी हमीरपुर को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी व विभागीय कार्रवाई की मांग की है। यह मामला बीते 5 अक्टूबर 2026 को हुई एक सड़क दुर्घटना में वृद्ध रामबाबू गुप्ता की मौत से जुड़ा हुआ है।
क्या है पूरा मामला – ज्ञापन के अनुसार
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद के जिला अध्यक्ष हमीरपुर कपिल देव यादव की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में घटना का पूरा विवरण दिया गया है। ज्ञापन के मुताबिक, रिरुआ बुजुर्ग निवासी रामबाबू गुप्ता अपने नाती के गांव से ई-रिक्शा क्रमांक UP 91AT 4895 पर सवार होकर अपने पैतृक गांव वापस लौट रहे थे।
बताया गया कि जब ई-रिक्शा सरीला क्षेत्र की सीमा के पास पहुंची, तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार चार पहिया वाहन (जिसका नंबर शिकायत में UP 93AN 0707 बताया गया है) ने ई-रिक्शा में पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ई-रिक्शा पलट गया। इस हादसे में रामबाबू गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गए, बाद में उनकी मौत हो गई। ई-रिक्शा में सवार अन्य लोग भी घायल हुए।
जालौन में FIR, धाराओं पर सवाल
ज्ञापन में कहा गया है कि इस घटना के संबंध में जालौन जनपद के जालौन थाने में पीड़ित परिवार की ओर से लिखित शिकायत दी गई थी। परिषद का आरोप है कि शिकायत के आधार पर दर्ज की गई प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की केवल धारा 281 (तेजी व लापरवाही से वाहन चलाना) और 106(1) (लापरवाही से मौत) लगाई गईं।
शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि घटना की प्रकृति और परिस्थितियों को देखते हुए इसकी निष्पक्ष जांच कर उचित और सख्त धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने मांग की है कि दुर्घटना की वास्तविक वजह, वाहन की गति और घटना के बाद की परिस्थितियों की गहराई से जांच की जाए।
सब-रजिस्ट्रार पर प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप
परिषद ने ज्ञापन में सबसे गंभीर आरोप सरीला में तैनात सब-रजिस्ट्रार सुशील कुमार गुप्ता पर लगाया है। ज्ञापन के अनुसार, अधिकारी ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए मामले की पुलिस कार्रवाई को प्रभावित करने का प्रयास किया।
आरोप है कि पीड़ित परिवार को मामले की वास्तविक स्थिति और की गई कार्रवाई की जानकारी तक नहीं दी गई। इसी कारण पीड़ित परिवार और संगठन के लोगों में आक्रोश है और कार्रवाई को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। संगठन का कहना है कि एक सरकारी अधिकारी द्वारा इस तरह का हस्तक्षेप न्याय की प्रक्रिया में बाधा है।
परिषद की 3 प्रमुख मांगें
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद ने जिलाधिकारी से इस प्रकरण में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए तीन सूत्रीय मांग पत्र सौंपा है –
1. घटना के लिए जिम्मेदार वाहन चालक और संबंधित व्यक्तियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सच्चाई सामने लाई जाए।
2. यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
3. संबंधित सब-रजिस्ट्रार के विरुद्ध विभागीय जांच बैठाई जाए और दोष सिद्ध होने पर सेवा से बर्खास्तगी सहित नियमानुसार कठोरतम कार्रवाई की जाए।
परिषद ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी, जैसे अपर जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी से कराई जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और प्रशासन पर लोगों का भरोसा बना रहे।
ज्ञापन सौंपने के दौरान मौजूद रहे
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष कपिल देव यादव के साथ जिले के कई पत्रकार साथी मौजूद रहे। इनमें भागवत प्रसाद, शैलेन्द्र सिंह, मुन्ना विश्वकर्मा, सुमित, पुष्पेंद्र भदौरिया, अमन अली, सुजीत कुमार, सुनील धुरिया, सौरभ मिश्रा, संदीप धुरिया, अजय प्रजापति,दीपक सोनी कुलदीप कुमार और पवन गुप्ता समेत समस्त पत्रकार बंधु उपस्थित रहे।
परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होगा।
