शमशान घाट तक रास्ता नहीं, अंतिम सफर भी दुश्वार: बारिश में कीचड़ से जूझ रहे ग्रामीण, बोले- कम से कम आखिरी सफर तो आसान हो

हमीरपुर। सरीला तहसील क्षेत्र के छिबोली गांव में शमशान घाट तक पहुंचने के लिए उचित रास्ता नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बारिश के मौसम में रास्ते पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति बन जाने से अंतिम संस्कार के लिए शव को शमशान घाट तक ले जाना बेहद मुश्किल हो जाता है।ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में करीब तीन-चार साल पहले शमशान घाट का निर्माण कराया गया था, लेकिन आज तक वहां तक पहुंचने के लिए सुगम रास्ते की व्यवस्था नहीं हो सकी। बारिश के दिनों में हालात और बदतर हो जाते हैं। ऐसे में जब किसी ग्रामीण की मौत होती है तो परिजनों और ग्रामीणों को शव को कंधे पर लेकर खराब और कीचड़ भरे रास्ते से शमशान घाट तक पहुंचना पड़ता है।ग्रामीण धर्मेंद्र, संदीप, अंकित और ब्रजेश ने बताया कि अंतिम संस्कार के समय रास्ते की समस्या सबसे ज्यादा सामने आती है। बारिश में कीचड़ के कारण शव को घाट तक ले जाने में काफी परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस रास्ते से किसी व्यक्ति को उसके जीवन का अंतिम सफर तय करना पड़ता है, वह रास्ता भी अगर बदहाल हो तो इससे बड़ी विडंबना क्या होगी।ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से शमशान घाट तक जल्द से जल्द पक्के रास्ते का निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि रास्ता बन जाने से गांव के लोगों को अंतिम संस्कार के दौरान होने वाली इस गंभीर समस्या से राहत मिल सकेगी।ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई करे, ताकि किसी परिवार को अपने प्रियजन की अंतिम यात्रा के दौरान इस तरह की मुश्किलों का सामना न करना पड़े।
